सोमवार, 11 मई 2009

राह पकड़ तू एक चला चल पा जायेगा मधुशाला

नवनीत प्रिय प्रकाश त्रिपाठी, गोरखपुर
मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवाला, किस पथ से जाऊं? असमंजस है वह भोलाभाला, अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूं, राह पकड़ तू एक चला चल, पा जायेगा मधुशाला। महाकवि हरिवंश राय बच्चन ने अपनी कृति मधुशाला में ये पक्तियां चाहे जिस संदर्भ में लिखी हो लेकिन गोरखपुर जनपद में कुटीर उद्योग का रूप ले चुके कच्ची शराब के धंधे पर ये बिल्कुल सटीक बैठती हैं। यकीन मानिये, गांव हो या शहर, कोई भी रास्ता पकड़ कर चलते रहिये, एकाध किलोमीटर चलने के बाद कच्ची शराब का ठीहा जरूर मिल जायेगा। जिले में हर जगह कच्ची का कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। ग्रामीण ही नहीं शहरी क्षेत्र में भी कई ऐसे थाने हैं जहां कारोबारियों के साथ ही साथ पुलिस वालों के लिये भी यह धंधा मोटी कमाई का जरिया बना हुआ है। इस धंधे को रोकने के लिये बनाये गये आबकारी विभाग पर सरकार के वार्षिक बजट का बड़ा हिस्सा भले ही खर्च होता है लेकिन धंधेबाजों से इस विभाग के लोगों की मिली भगत किसी से छिपी बात नहीं है। पुलिस वालों के नजरिये से अच्छा थाना कहे जाने वाले ग्रामीण क्षेत्र में झगहा, चौरीचौरा, पिपराइच, खजनी, कैंपियरगंज और शहरी क्षेत्र में खोराबार, गुलरिहा, शाहपुर, राजघाट, तिवारीपुर, कैंट जैसे थानों में तैनाती के लिये पुलिस वालों के बीच मारामारी के पीछे एक बड़ी वजह यही है। सूत्रों के मुताबिक इन थाना क्षेत्रों में इस धंधे से नियमित रूप से मिलने वाली मोटी रकम आंखे चुधियाने वाली हैं। इन थानों के अलग-अलग हल्कों में तैनात सिपाहियों की संख्या से भी इस धंधे की कमाई का अंदाजा लगाया जा सकता है। किसी थाने के जिस हल्के में यह धंधा जितने बड़े पैमाने पर होता है वहां सिपाहियों की संख्या उतनी ही अधिक होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ईट भट्ठे इस कारोबार का प्रमुख अड्डा बने हुए हैं। इसके अलावा नदी के किनारे और दूर-दराज के क्षेत्रों में भी यह धंधा बड़े पैमाने पर होता है। शहरी क्षेत्र में नदी का किनारा इस धंधे का मुख्य केन्द्र है। इसके साथ ही शहर से लगे कुसम्हीं जंगल में धंधा खूब फल-फूल रहा है। राजघाट क्षेत्र की अमुरतानी तो पहले से ही इस कारोबार के लिये बदनाम है। विभाग से जुड़े भरोसे मंद सूत्रों के मुताबिक इस काले कारोबार से होने वाली कमाई में सबका हिस्सा बंधा होता है। यही हाल आबकारी विभाग का भी है। कारोबारी हर क्षेत्र में तैनात आबकारी विभाग के कर्मचारियों का हिस्सा पूरी ईमानदारी से उनके पास पहंुचा देते हैं। कभी कभार दिखावे के लिये ही सही कार्रवाई का दबाव पड़ने पर पुलिस या आबकारी विभाग के कर्मचारियों के कहने पर धंधेबाज अपने परिवार के एक व्यक्ति को पांच या दस लीटर कच्ची शराब के साथ भेजे देते हैं। साठ आबकारी एक्ट के तहत उनका चालान होता है और आबकारी अधिनियम के तहत उन्हें थाने से ही जमानत दे दी जाती है।

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